My Dear...

Friday, 21 June 2013

धुम धड़ाका संगीत के बीच...एक सुफीयाना भी


दफ्तर के काम से रिर्पोटिंग के लिए कहीं गया था. गाड़ी में एक गजल सुन रहा था..मुन्नी बेग़म की आवाज थी. शानदार आवाज साथ ही साथ खुबसूरत उस ग़ज़ल के बोल. वैसे इससे पहले भी इस ग़ज़ल को कई बार सुना है. लीजिए आप भी गुनगुनाइए.......

लज्ज़ते ग़म बढ़ा दीजिए
आप यूं मुस्कुरा दीजिए

कींमते दिल बता दीजिए
खाक लेकर उड़ा दीजिए

आप अंधेरे में कब तक रहें
फिर कोई घर जला दीजिए

मेरे दामन बहुत साफ है
कोई तोहमत लगा दीजिए

चांद कब तक गहन में रहे
अपनी जुल्फें हटा लीजिए

एक समंदर ने आवाज दी
मुझको पानी पिला दीजिए

ऐसा नही है कि मैं आपलोगो को एक ही ग़ज़ल या गीत के साथ छोड़ दुंगा..ऐसा हरगीज नही है.. जब कभी भी अच्छी ग़ज़ल या गीत मेरे कानों को अच्छे लगेंगे तो जरुर मैं आपके साथ बांटना चाहुंगा...