सुबह अंधेरा छाया हुआ था और कहीं रात में भी उजालों की जगमग थी…...
इस पंक्ति को पढ़ने से पहले यह ना समझ लें की वहाँ धूप नही थी। बल्कि आप
यह ज़रुर समझ लें कि हर सुबह उनके लिए अंधेरा ही होता है....।
रविवार का दिन था शाम में दफ्तर भी जाना था तभी सुबह-सुबह
समाज सेवा करने का मौका मिल गया। हाई कोर्ट के सीनीयर वकील अशोक अग्रवाल
और जाने माने समाज सेवी ने मुझे फोन कर के कुछ नेक काम करने के लिए पूछा।
मैने हाँ किया और चल पड़ा उनके साथ। कारवाँ हमारा दिल्ली की झुग्गियों की
तरफ चला। थाना उस्मानपुर दिल्ली का एक बहुत बड़ा इलाका जहाँ पूरी झुग्गी
ही झुग्गी। हमें वहाँ यह देखना था की यहाँ के कितने बच्चे स्कूल का दर्शन
देते हैं। उस झुग्गी बस्ती में घुसते ही कुछ अलग ही नज़ारा था जिसे आज तक
भूला नही जाता और कुछ भी खाने से पहले उस मंज़र को याद करता हूँ। देखा की
एक बूढ़ी औरत एसी सोई हुई थी जैसे की उसमे कोई जान नही हो। मैने उठा के
पूछा ‘अरे क्या हुआ अम्मा?? उसने कुछ जवाब नही दिया, फिर उसके घर से एक
लड़का निकला, उससे मैने पूछा तो कहा कि परसो से इसने खाना नही खाया है।
दंग रह गया मैं। मैने पूछा तुम क्या करते हो? उसने कहा भीख मांगता हूँ
साहब। मेरी आँखें नम हो गईं। बार-बार यही ख़याल आता था कि हमारे पूर्व
राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम ने तो 2020 में राष्ट्र को विक्सित करने का
सपना तो बुन लिय था पर शायद उन्होंने इस तरह का नज़ारा कभी नही देखा
होगा। लड़के से पूछा दिन भर में कितना इकट्ठा कर लेते होगे? उसने उदासी भरी
आवाज़ में बोला 15-20 रूपये रोज़ कर लेता हूँ। मैने पूछा फिर अपनी दादी
को खाना क्यों देते???? चेहरे पर बिना कोई उम्मीद और ख्व़ाब, आँखों मे
पानी सूखे हुआ जैसे कोई बंजर ज़मीन हो, फिर कहता है सारे पैसे का खाना ही
लेंगे तो कमरे का किराया कहाँ से देंगें। इस छोटे से कंधे पर इतनी बड़ी
ज़िम्मेदारी!!!!! INDIA SHINING………….
रईस और बड़े घर के बच्चे तो स्कूल भी अपने पापा के बड़ी वाली कार मे बैठ कर PIZZA ,BURGER खाते हूए पहुंच जाते हैं। AC गाड़ी ना हो तो पसीने से बेचारे लतपत हो जाते हैं। काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है ,पर ग़रीब और झुग्गीयों के बच्चे तो ऐसे ही हैं। उन्हे क्या पता ऐश-ओं-आराम क्या होता है। पर भूख लगने पर चेहरे की चमक उड़ जाती है।
उस बड़ी आबादी में शायद ही किसी के घर चूल्हा जला हो। जब खाने की कोई उम्मीद ना हो और काम का कोइ ज़रिया ना हो तो सुबह-सुबह उठ कर ब्रश करने का क्या फायदा????
पूरे चार घंटे तक उस REAL INDIA में घूमा। अजीबों-गरीब से सवाल मेरे मन मे आ रहे थे। लेकिन मै एक पत्रकार क्या कर सकता था। झप्पी के अलावा मेरे पास कोई चारा ही नही था। उस दिन पता चला गरीब का दिल कितना बड़ा होता है। झप्पी से इतने खुश होते जैसे कुछ बहुत बड़ा मिल गया हो। एक से बढ़कर एक परेशानियां वहां देखी। कोई दिन भर मे 30 कमा रहा तो कोई 20 रूपये। क्या होगा इन 20-30 रूपयों में?? सरकार ने तो 32 रूपये कमाने वाले को अमीर घोषित कर दिया है ,अब तो गरीब ढूंढने से नही मिलेंगे। 12 बजते ही अब दफ्तर की याद आई की अब वहां भी चलना है। रात में MIKA SINGH का मेहरौली में शो था और फैशन शो का भी कार्यक्रम था वहां पर। केवल रईस लोगों को जाने की इजाज़त थी। पत्रकार होने के नाते मुझे भी वहां बुलाया गया था। रात के 12 बजे तो ऐसी चहल-पहल थी जैसे दिन भी उस रात से शर्मा जाए। बड़े लोगों की पार्टी थी शराब और कवाब का पूरा इंतज़ाम था। कितने लोग तो अपने कुत्तों को भी साथ लाए थे ताकि उसका भी मन दुरुस्त रहे। किसी कुत्ते का नाम TUMMY था तो किसी का नाम BUDDY था। उनकी अलग पार्टी चल रही थी। फिर मुझे इन कुत्तों की कहानी और सुबह मे उस लड़के की कहानी याद आती रही। जब MIKA SINGH ने गाना शुरू किया तो लोगों ने शराब की होली खेली जैसे उन्हें इस असली भारत के बारे मे पता ना हो। वहां भी पप्पी और झप्पी जमकर चल रही थी पर उसका अंदाज़ अलग था। रंगीन रात थी। मस्ती जमकर चल रही थी। पर अफसोस तो यह है, हम लोग इन्ही बड़े लोगों को देखकर सोच लेते है हमारा देश प्रगति पर है............
Edited by- Komal Hemthani LIVE INDIA NEWS
इस पंक्ति को पढ़ने से पहले यह ना समझ लें की वहाँ धूप नही थी। बल्कि आप
यह ज़रुर समझ लें कि हर सुबह उनके लिए अंधेरा ही होता है....।
रविवार का दिन था शाम में दफ्तर भी जाना था तभी सुबह-सुबह
समाज सेवा करने का मौका मिल गया। हाई कोर्ट के सीनीयर वकील अशोक अग्रवाल
और जाने माने समाज सेवी ने मुझे फोन कर के कुछ नेक काम करने के लिए पूछा।
मैने हाँ किया और चल पड़ा उनके साथ। कारवाँ हमारा दिल्ली की झुग्गियों की
तरफ चला। थाना उस्मानपुर दिल्ली का एक बहुत बड़ा इलाका जहाँ पूरी झुग्गी
ही झुग्गी। हमें वहाँ यह देखना था की यहाँ के कितने बच्चे स्कूल का दर्शन
देते हैं। उस झुग्गी बस्ती में घुसते ही कुछ अलग ही नज़ारा था जिसे आज तक
भूला नही जाता और कुछ भी खाने से पहले उस मंज़र को याद करता हूँ। देखा की
एक बूढ़ी औरत एसी सोई हुई थी जैसे की उसमे कोई जान नही हो। मैने उठा के
पूछा ‘अरे क्या हुआ अम्मा?? उसने कुछ जवाब नही दिया, फिर उसके घर से एक
लड़का निकला, उससे मैने पूछा तो कहा कि परसो से इसने खाना नही खाया है।
दंग रह गया मैं। मैने पूछा तुम क्या करते हो? उसने कहा भीख मांगता हूँ
साहब। मेरी आँखें नम हो गईं। बार-बार यही ख़याल आता था कि हमारे पूर्व
राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम ने तो 2020 में राष्ट्र को विक्सित करने का
सपना तो बुन लिय था पर शायद उन्होंने इस तरह का नज़ारा कभी नही देखा
होगा। लड़के से पूछा दिन भर में कितना इकट्ठा कर लेते होगे? उसने उदासी भरी
आवाज़ में बोला 15-20 रूपये रोज़ कर लेता हूँ। मैने पूछा फिर अपनी दादी
को खाना क्यों देते???? चेहरे पर बिना कोई उम्मीद और ख्व़ाब, आँखों मे
पानी सूखे हुआ जैसे कोई बंजर ज़मीन हो, फिर कहता है सारे पैसे का खाना ही
लेंगे तो कमरे का किराया कहाँ से देंगें। इस छोटे से कंधे पर इतनी बड़ी
ज़िम्मेदारी!!!!! INDIA SHINING………….
रईस और बड़े घर के बच्चे तो स्कूल भी अपने पापा के बड़ी वाली कार मे बैठ कर PIZZA ,BURGER खाते हूए पहुंच जाते हैं। AC गाड़ी ना हो तो पसीने से बेचारे लतपत हो जाते हैं। काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है ,पर ग़रीब और झुग्गीयों के बच्चे तो ऐसे ही हैं। उन्हे क्या पता ऐश-ओं-आराम क्या होता है। पर भूख लगने पर चेहरे की चमक उड़ जाती है।
उस बड़ी आबादी में शायद ही किसी के घर चूल्हा जला हो। जब खाने की कोई उम्मीद ना हो और काम का कोइ ज़रिया ना हो तो सुबह-सुबह उठ कर ब्रश करने का क्या फायदा????
पूरे चार घंटे तक उस REAL INDIA में घूमा। अजीबों-गरीब से सवाल मेरे मन मे आ रहे थे। लेकिन मै एक पत्रकार क्या कर सकता था। झप्पी के अलावा मेरे पास कोई चारा ही नही था। उस दिन पता चला गरीब का दिल कितना बड़ा होता है। झप्पी से इतने खुश होते जैसे कुछ बहुत बड़ा मिल गया हो। एक से बढ़कर एक परेशानियां वहां देखी। कोई दिन भर मे 30 कमा रहा तो कोई 20 रूपये। क्या होगा इन 20-30 रूपयों में?? सरकार ने तो 32 रूपये कमाने वाले को अमीर घोषित कर दिया है ,अब तो गरीब ढूंढने से नही मिलेंगे। 12 बजते ही अब दफ्तर की याद आई की अब वहां भी चलना है। रात में MIKA SINGH का मेहरौली में शो था और फैशन शो का भी कार्यक्रम था वहां पर। केवल रईस लोगों को जाने की इजाज़त थी। पत्रकार होने के नाते मुझे भी वहां बुलाया गया था। रात के 12 बजे तो ऐसी चहल-पहल थी जैसे दिन भी उस रात से शर्मा जाए। बड़े लोगों की पार्टी थी शराब और कवाब का पूरा इंतज़ाम था। कितने लोग तो अपने कुत्तों को भी साथ लाए थे ताकि उसका भी मन दुरुस्त रहे। किसी कुत्ते का नाम TUMMY था तो किसी का नाम BUDDY था। उनकी अलग पार्टी चल रही थी। फिर मुझे इन कुत्तों की कहानी और सुबह मे उस लड़के की कहानी याद आती रही। जब MIKA SINGH ने गाना शुरू किया तो लोगों ने शराब की होली खेली जैसे उन्हें इस असली भारत के बारे मे पता ना हो। वहां भी पप्पी और झप्पी जमकर चल रही थी पर उसका अंदाज़ अलग था। रंगीन रात थी। मस्ती जमकर चल रही थी। पर अफसोस तो यह है, हम लोग इन्ही बड़े लोगों को देखकर सोच लेते है हमारा देश प्रगति पर है............
Edited by- Komal Hemthani LIVE INDIA NEWS
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